23 वीं वर्षगांठ

rekha rani

रचनाकार- rekha rani

विधा- गीत

दीपक बाति बनकर हम तुम घर -मन्दिर को प्रकाशित करेंगे।
तुम दीपक में प्रेम का घृत बन,बाति बन मैँ समर्पण करेंगे।
जब तक स्नेह का घृत है दीए में तब तक मैं बाति भी खुश हो जलूँगी।
मेरे मन-मन्दिर के हो तुम आराध्य।
बनके पुजारिन आराधना करूंगी।
दोनों हैं मेरे जो लड्डू गोपाल
निस-दिन मैं उनकी सेवा करूंगी।
तुम बनना बादल पवन मैं बनूँगी।
मेरे घर उपवन मे स्नेह की वर्षा सतत हम करेंगे।
करके विचारों का चिंतन मनन सदा सही पथ हम चुनेंगे।
मेरे देव रेखा की सांसों में तुम हो।
तेरे साथ प्यारा सफर तय करेंगे

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rekha rani
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मैं रेखा रानी एक शिक्षिका हूँ। मै उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ1 मे अपने ब्लॉक में मंत्री भी हूँ। मेरे दो प्यारे फूल (बच्चे) ,एक बाग़वान् अर्थात मेरे पति जो प्रतिपल मेरे साथ रहते हैं। मेरा शौक कविताये ,भजन,लेखन ,गायन, और प्रत्येक गतिविधि मे मुख्य भूमिका निभाना। मेरी उक्ति है कौन सो काज कठिन जगमाहि जो नही होत रेखा तुम पाही। आर्थात जो ठाना वो करना है। गृ हस्थ मे कविताएं न प्रकाशित कर पाईं

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