15 अगस्त

purushottam sinha

रचनाकार- purushottam sinha

विधा- कविता

ये है 15 अगस्त, स्वतंत्र हो झूमे ये राष्ट्र समस्त!

ये है उत्सव, शांति की क्रांति का,
है ये विजयोत्सव, विजय की जय-जयकार का,
है ये राष्ट्रोत्सव, राष्ट्र की उद्धार का,
यह 15 अगस्त है राष्ट्रपर्व का।

याद आते है हमें गांधी के विचार,
दुश्मनों को भगत, आजाद, सुभाष की ललकार,
तुच्छ लघुप्रदेश को पटेल की फटकार,
यह 15 अगस्त है राष्ट्रकर्म का।

विरुद्ध उग्रवाद के है यह इक विगुल,
विरुद्ध उपनिवेशवाद के है इक प्रचंड शंखनाद ये,
देश के दुश्मनों के विरुद्ध है हुंकार ये,
यह 15 अगस्त है राष्ट्रगर्व का।

ये उद्घोष है, बंधनो को तोड़ने का,
है यह उद्बोध, देशभक्ति से राष्ट्र को जोड़ने का,
है यह एक बोध, स्वतंत्रता सहेजने का,
यह 15 अगस्त है राष्ट्रधर्म का।

ये है 15 अगस्त, स्वतंत्र हो झूमे ये राष्ट्र समस्त।

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purushottam sinha
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