13,अहसास

Versha Varshney

रचनाकार- Versha Varshney

विधा- कविता

जर्रा जर्रा वक़्त का जैसे रो रहा था ,
आंसुओं से कोई चेहरा भिगो रहा था ।
मासूम थी मोह्हबत कहीं सिर झुकाए ,
हर घड़ी कोई दिल में यादों के जख्म चुभो रहा था।
प्यार की भाषा कब दे पाती है कोई परिभाषा ,
दिल क्यों दिल को यकीन दिला रहा था
दर्द था कोई मीठा सा अनजान की यादों का ,
सुनने को बेताब दिल आवाज किसी की,
दिल को खामोशी से सहला रहा था ।
कब समझती है मोह्हबत कायदे और कानून ,
एक भीगा सा अहसास जैसे कोई गुनगुना रहा था ।
वर्षा वार्ष्णेय अलीगढ़

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Versha Varshney
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कवियित्री और लेखिका अलीगढ़ यू पी !_यही है_ जिंदगी" मेरा कविता संग्रह है ! विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में लेखन ! साझा संकलन -१.भारत की प्रतिभाशाली हिंदी कवयित्रियाँ ! २.पुष्पगंधा pride of the women award 2017 Money is not important then love,bec love is God n God is our life . my blog -http://vershavarshney.blogspot.in/ my page -https://www.facebook.com/versha22.writer/?ref=aymt_homepage_panel .

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