🔥धरती जलने लगी🔥

मानक लाल*मनु*

रचनाकार- मानक लाल*मनु*

विधा- कविता

🔥धरती जलने लगी🔥
हर तरफ से आग ही आग है जलने लगी।।
मेरा अंबर मेरी धरती जलने लगी।।

ये जमाना मेरा न तेरा फिर क्यों,
मजहबो के नाम से शाजिसे चलने लगी।।

कौन आये कौन जाये इसका क्या मालूम है।।
बस इंसानी दिलो मे नफरते पलने लगी।।

वो पड़ोसी हम पड़ोसी फिर ये क्या फितूर छाया,
बेकसूरो पर गोलियां क्यो चलने लगी।।

कुछ करो अमन की खातिर ये वतन बालो,
मनु के दिल मे बात ये पलने लगी।।
☄मानक लाल मनु☄

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मानक लाल*मनु*
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सरस्वती साहित्य परिशद के सदस्य के रूप में रचना पाठ,,, स्थानीय समाचार पत्रों में रचना प्रकाशित,,, सभी विधाओं में रचनाकरण, मानक लाल मनु,

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