💟💟कर लेता हूं💖💖

मानक लाल*मनु*

रचनाकार- मानक लाल*मनु*

विधा- कविता

💟💟कर लेता हूं💖💖
कभी कभी अपनी किस्मत पर यकीन कर लेता हूं,,,,
भला तो हूँ बहुत मगर फिर भी गुन्हा संगीन कर लेता हूं,,,,

एक तेरा नाम है,सोहरत है,इस मुक्कमल जहान मे,,,,
बस इसलिए यारा तुझमें ही नजरे लीन कर लेता हूं,,,,

कोई दुआ कर देना इश्क़ की खातिर वक़्त मिल जाये तो,,,,
में भी तेरी दूरकी यादों से आंखे नमकीन कर लेता हूं,,,,

सीखा नही में किसी मदरसे से मैंने हरफो को पढ़ना,,,,
फिर तेरी भलाई में इबादत नमाज़ आमीन पढ़ लेता हूं,,,,

मनु की बात का तुझपे असर अक्सर कम ही रहा है,,,,
पर यकीन करना में तेरी गप्प पर भी यकी कर लेता हूं,,,,

मानक लाल मनु,,,,
सरस्वती साहित्य परिषद,,,,

Sponsored
Views 17
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
मानक लाल*मनु*
Posts 61
Total Views 1.2k
सरस्वती साहित्य परिसद के सदस्य के रूप में रचना पाठ,,, स्थानीय समाचार पत्रों में रचना प्रकाशित,,, सभी विधाओं में रचनाकरण, मानक लाल मनु,

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia