💐💐💐 हाय रे गर्मी💐💐💐

Santosh Barmaiya

रचनाकार- Santosh Barmaiya

विधा- हाइकु

तपता सूर्य।
चिलचिलाती धूप।
ऊफ, ये गर्मी।।1।।

भीषण आग।
झुलसता बदन।
हाय रे गर्मी।।2।।

सहमे तरु।
पथ तपती रेत।
जाय न गर्मी।।3।।

सरि निस्तेज।
बयार बहे तेज।
छाय है गर्मी।।4।।

जले यौवन।
पिघले हिम कण।
भाय न गर्मी।।5।।

संतोष बरमैया"जय"

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Santosh Barmaiya
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मेरा नाम- संतोष बरमैया"जय", पिताजी - श्री कौशल किशोर बरमैया,ग्राम- कोदाझिरी,कुरई, सिवनी,म.प्र. का मूल निवासी हूँ। शिक्षा-बी.एस.सी.,एम ए, बी.ऐड,।अध्यापक पद पर कार्यरत हूँ। मेरी रचनाएँ पूर्व में देशबन्धु, एक्स प्रेस,संवाद कुंज, अख़बार तथा पत्रिका मछुआ संदेश, तथा वर्तमान मे नवभारत अखबार में प्रकाशित होती रहती है। मेरी कलम अधिकांश समय प्रेरणा गीत तथा गजल लिखती है। मेरी पसंदीदा रचना "जवानी" l

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