💐नारी जगत को समर्पित अल्फाज💐

मानक लाल*मनु*

रचनाकार- मानक लाल*मनु*

विधा- कविता

💐नारी जगत को समर्पित अल्फाज💐
दुनिया में मेरे आने का एक तुम ही बस जरिया हो नारी।।
माँ बनके आँचल दूध पिलाया तुम ही वो दरिया हो नारी।1।
लालन पालन न होता तो घुट घुट कर के मर जाता मैं,
ये अमृत पान किया तुम से बिन इसके न बढ़ पाता मैं,
घनी धूप से इस जीवन मै शीतल तुम ही वो बदरिया हो नारी।2।
संग खेला जिसके खेल कई,
जब देखा तब तुम लगी नई,
धागे में जिसके जीवन बंधा तुम ही वो बहनिया हो नारी।3।
गुड्डा गुड्डी का विवाह रचाया,
संग घर के कोने मै खाना खाया,
मेरी बचपन की साथी तुम ही वो सहलिया हो नारी।4।
कुछ कसमो कुछ रशमो के संग,
एक नया रूप और एक नया रंग,
मेरे जीवन में आई तुम ही वो पुतरिया हो नारी।5।
गोदी में आई बेटी बन,
खुशियों से भर दीना जीवन,
नन्हे कदमों में जिसके पारश तुम ही वो पथरिया हो नारी।6।
कितना मनु तेरा बखान करे
किन शब्दों में तेरा गान करे,
ये तन मन तुम्हे समर्पित है तुम ही वो डगरिया हो नारी।7।
✍�(मानक लाल मनु)✍

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सरस्वती साहित्य परिसद के सदस्य के रूप में रचना पाठ,,, स्थानीय समाचार पत्रों में रचना प्रकाशित,,, सभी विधाओं में रचनाकरण, मानक लाल मनु,

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