🐾वो आयी🐾

मानक लाल*मनु*

रचनाकार- मानक लाल*मनु*

विधा- कविता

🐾वो आयी🐾

बेरुखी से भरी जिंदगी में फिर बहार आयी,,
अश्को में भीगे नैनो में एक फुहार आयी।।

ख़ुशी का आलम तुम्हे बताये क्या है,,
ये समझो की एक नयी पुकार आयी।।

वो अफसाने फ़साने जमाने के ढोंग खत्म हो गये,,
वो आयी तो जिंदगी में ख़ुशी हजार आयी।।

ये मुकद्दर भी अब उसका गुलाम हुआ,,
कानों में जब उसकी प्रीत की झंकार आयी।।

मनु का नाता ज़माने से कहाँ है,,
वो पहली कली और फूलो कतार आयी।।
⛄मानक लाल मनु⛄

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मानक लाल*मनु*
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सरस्वती साहित्य परिसद के सदस्य के रूप में रचना पाठ,,, स्थानीय समाचार पत्रों में रचना प्रकाशित,,, सभी विधाओं में रचनाकरण, मानक लाल मनु,

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