🌺🌻 श्रीकृष्ण लीला 🌻🌺

तेजवीर सिंह

रचनाकार- तेजवीर सिंह "तेज"

विधा- घनाक्षरी

🙏 श्रीकृष्ण लीला 🙏
(प्रसङ्ग – खेल में श्रीकृष्ण और सखाओं के बीच का वार्तालाप )
🌷विधा – मनहरण घनाक्षरी🌷

🙏जय जय श्रीराधे…..श्याम🙏
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कुंजन निकुंजन में
खेल-खेल लुका-छिपी
समझे हो मन-मांहि
बड़े ही खिलार हौ।

धार कें उंगरिया पै
थारी बिन पैंदे वारी
करौ अभिमान बड़े
तीक्ष्ण हथियार हौ।

देखौ रण-कौशल हू
भागि भये रणछोर
अरे डरपोक कहा
भौंथरी ही धार हौ।

हमऊँ हैं ब्रजबासी
झांसे में यों नाय आवैं
तेज भले कितने हो
पर तुम गमार हौ।

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खेल रह्यौ घात कर
*जीत* की न बात कर
घने देखे तेरे जैसे
कृष्ण-नंदराय जू।

तेरे हों खिरक भरे
कमी हमारेउ नाय
अनगिन बंधी द्वार
जाय देख गाय जू।

नित करै रुमठाई
हमपै सही न जाय
जाय जसुदा के ढिंग
दें सब सुनाय जू।

बसते न तेरी ठौर
न ही तेरौ दियौ खामें
'तेज' ऐसे लच्छन न
हमकूं सुहाय जू।

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🙏 तेज मथुरा✍

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तेजवीर सिंह
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नाम - तेजवीर सिंह उपनाम - 'तेज' पिता - श्री सुखपाल सिंह माता - श्रीमती शारदा देवी शिक्षा - एम.ए.(द्वय) बी.एड. रूचि - पठन-पाठन एवम् लेखन निवास - 'जाट हाउस' कुसुम सरोवर पो. राधाकुण्ड जिला-मथुरा(उ.प्र.) सम्प्राप्ति - ब्रजभाषा साहित्य लेखन,पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन तथा जीविकोपार्जन हेतु अध्यापन कार्य।

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