🌹बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ🌹

तेजवीर सिंह

रचनाकार- तेजवीर सिंह "तेज"

विधा- घनाक्षरी

🌺🌼 जलहरण घनाक्षरी 🌼🌺

🌺🌼🌻🌺🌼🌻🌺🌼🌻🌺

*बेटियां बचाओ* और
*बेटियां पढ़ाओ* सब
बेटियों पे टिका जग
बेटी है परम् धन।

कोख में जो बेटी हो तो
कभी न उजाड़ें कोख
सृजन आधार हेतु
शुद्ध करें निज मन।

बेटी न रहेगी यदि
बहू कैसे लाएं आप
प्रश्न ये जटिल बड़ा
ध्यान दें सकल जन।

बेटियों का रूप- *तेज*
घर में उजाला करे
संस्कृति का पोषण हो
मन से करें जतन।।
🌹🌻🌼🌹🌻🌼🌹🌻🌼🌹
🙏तेज 21/04/17✍

🌺🌼🌻🌺🌼🌻🌺🌼🌻🌺

बेटी को बचाओ अब
बेटी को पढ़ाओ सब
बेटी पे टिका है जग
बेटी है परम धन।

बेटी भाग्य बेटी कर्म
बेटी मोक्ष बेटी धर्म
बेटी ही सृजन करे
पीढ़ियों के तन मन।।

बेटी है धरा का स्वर्ग
बेटी ज्ञान बेटी तर्क
बेटी ही विचार है तो
चलो सब करें प्रन।

जीवन बचाना है तो
बेटी को बचाना होगा
'तेज' करो जागरुक
जगें जन गण मन।।

🌹🌻🌼🌹🌻🌼🌹🌻🌼🌹

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तेजवीर सिंह
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नाम - तेजवीर सिंह उपनाम - 'तेज' पिता - श्री सुखपाल सिंह माता - श्रीमती शारदा देवी शिक्षा - एम.ए.(द्वय) बी.एड. रूचि - पठन-पाठन एवम् लेखन निवास - 'जाट हाउस' कुसुम सरोवर पो. राधाकुण्ड जिला-मथुरा(उ.प्र.) सम्प्राप्ति - ब्रजभाषा साहित्य लेखन,पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन तथा जीविकोपार्जन हेतु अध्यापन कार्य।

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