🌸🌼माँ🌼🌸

कृष्णकांत गुर्जर

रचनाकार- कृष्णकांत गुर्जर

विधा- कविता

🌸🌼माँ🌼🌸
माँ बडी अनमोल है माँ को तड़पने तुम न दो
माँ अमृत की बूँद है माँ को बिखरने तुम न दो
आँख से निकले आसू गर उसको भी गिरने तुम न दो
माँ बडी अनमोल है माँ को तड़पने तुम न दो
🌸🌼माँ🌼🌸
माँ ही ब्रम्हा माँ ही विष्णु माँ ही भोले नाथ है
हर मुश्किल मे बिन स्वार्थ के देती माँ ही साथ है
ईश्वर के इस को अब तुम बिलखने अब न दो
माँ बडी अनमोल है माँ को तड़पने तुम न दो
🌸🌼माँ🌼🌸
माँ ही गंगा माँ ही यमुना माँ कावेरी रेवा है
तत्पर रहकर विन स्वार्थ के करती माँ ही सेबा है
अपनी माँ को ऐसे यारो अब विलखने तुम न दो
माँ बडी अनमोल है माँ को तड़पने तुम न दो
🌸🌼माँ🌼🌸
माँ मृत्यु माँ ही जीवन माँ ही यारो प्राण है
सारे जग का यारो सुनलो करती माँ कल्याण है
माँ की प्यारी ममता को अब उजड़ने तुम न दो
माँ बडी अनमोल है माँ को तड़पने तुम न दो
🌸🌼माँ🌼🌸
माँ ही भव है माँ ही सागर माँ ही जग से तार दे
सारी जिंदगी खुशहाली से यारो माँ गुजार दे
माँ गरीब लाचार को अब तुम विलखने तुम न दो
माँ बडी अनमोल है माँ को तड़पने तुम न दो
🌸🌼माँ🌼🌸
सारी दुनि़या बनी पुजारी माँ से यारी श्रृष्टि हारी
माँ से होते नर उर नारी सारी दुनिया माँ को प्यारी
बिन माँ के सब सून है यारो,माँ को मचलने तुम न दो
माँ बडी अनमोल है माँ को तड़पने तुम न दो
🌸🌼माँ🌼🌸
माँ की सेबा करले कृष्णा मां करती भवपार है
माँ ही जीवन का प्यार है माँ ही सब संसार है
अपनी जननी मैया को अब तड़पने तुम न दो
माँ बडी अनमोल है माँ को तड़पने तुम न दो
🌸🌼माँ🌼🌸

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कृष्णकांत गुर्जर
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संप्रति - शिक्षक संचालक G.v.n.school dungriya G.v.n.school Detpone मुकाम-धनोरा487661 तह़- गाडरवारा जिला-नरसिहपुर (म.प्र.) मो.7805060303

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