फ़रवरी

Bharat Kumar singh

रचनाकार- Bharat Kumar singh

विधा- कविता

फ़रवरी है वर्ष का सबसे युवा सा महिना .
भागती ठण्ड आता खुशनुमा सा सारा जमाना .
पागल होते प्रेमी सारे प्रेमिका पे होकर दीवाना .
मुस्कुराते हैं फुल सारे, भौरे भी गाते गाना .
प्रेमिका भी प्रेमी से कहते ये दिल है आशिकाना .
बसंत आती है ग़म भी यहाँ से हो जाते रवाना .
खुशियों में डूब सब , दिल हो जाता परवाना .
छोड़ आलस्य लोग कहते मुझे भी है कुछ करना
चौदह को देख वेलेंटाइन होते सब कोई दीवाना .
बुड्ढे भी इश्क फरमाते युवाओं का क्या कहना .
देख वो दौड़ा गुलाब लेकर, क्या पता किसे है देना .
नज़रों ही नज़रों में फिट हुआ मुश्किल सा निशाना .
वाह रे वाह कैसा है यह फ़रवरी का महिना .

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