ढ़लती हुई उम्र में,यौवन को आ जाने दें

Bhupendra Rawat

रचनाकार- Bhupendra Rawat

विधा- कविता

ढ़लती हुई उम्र में,यौवन को आ जाने दें।
बची हुई उम्र में,दबी हुई ख्वाईश
को आज आज़माने दें।
आईने में आज ख़ुद को सवंर जाने दें।
जुल्फों को आज बिख़र जाने दे।
हुस्न ऐ जुम्बिश का जलवा बिखर जाने दे
चश्म ओ चिराग़ को भी आज
अपना हुस्न का नूर दिखाने दे।
चाहने वालो को आज गुश हो जाने दे।
भूपेंद्र रावत
05।01।2017
चश्म ओ चिराग=प्रिय
गुश=बेहोश
हुस्न ऐ जुम्बिश=हुस्न की हरकत

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Bhupendra Rawat
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M.a, B.ed शौकीन- लिखना, पढ़ना हर्फ़ों से खेलने की आदत हो गयी है पन्नो को जज़बातों की स्याही से रँगने की अब बगावत हो गईं है ।

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