ज़िस्मानी घर…

sushil sarna

रचनाकार- sushil sarna

विधा- मुक्तक

ज़िस्मानी घर…

एक पल में हर पल बदल जाता है l
ज़िंदगी का हर कल बदल जाता है l
ये सांसें कुछ समझ ही नहीं ..पाती –
ज़िस्मानी घर राख में बदल जाता है l

सुशील सरना

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sushil sarna
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I,sushil sarna, resident of Jaipur , I am very simple,emotional,transparent and of-course poetry loving person. Passion of poetry., Hamsafar, Paavni,Akshron ke ot se, Shubhastu are my/joint poetry books.Poetry is my passionrn

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