“ज़िन्दगी”

Rupesh Kumar

रचनाकार- Rupesh Kumar

विधा- कविता

लोग बुरे नहीं होते….
बस जब आपके मतलब के नहीं होते…
तो बुरे लगने लगते है…।।
समझनी है जिंदगी तो पीछे देखो
जीनी है जिंदगी को तो आगे देखो
हम भी वहीं होते है
रिश्ते भी वहीं होते हैं
और रास्ते भी वहीं होते हैं
बदलता है तो बस….
समय,एहसास और नजरिया…।।

~ रूपेश कुमार

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Rupesh Kumar
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I am a competitive student... i am research schooler..
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