ज़िंदगी खत्म

Yash Tanha Shayar Hu

रचनाकार- Yash Tanha Shayar Hu

विधा- कविता

ख़ुदा तेरी कितनी मेहरबानी हम पर,
की शाम को हम बेहोश हो जाते है ,
ज़िंदगी तेरा सारा दिन हम बोझ सहकर ,
शाम को हम तो मदहोश हो जाते है,

सलीखा कोई सीखा दे ज़िंदगी जीने का हमें,
की शाम को हम तो खामोश हो जाते है,
सरहदों पर दम तोड़ देती है ख्वाइशें,
मजबूर तनहा जय हो का नारा लगाते है,

किन परछाइयों की बात करते हो तुम तनहा,
जो सुबह की भीड़ में अपना चेहरा छुपाते है,
घोंसलों के तिनके इकट्ठे करने में ज़िंदगी खत्म,
और घोंसले को बनाने में कितने तिनके टूट जाते है,

Sponsored
Views 74
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Yash Tanha Shayar Hu
Posts 48
Total Views 2k
Yash Pal Sejwal born 10th March 1980 is a Poet,Lyrics,Songs writer from Delhi, I create and started writing on Facebook page "Tanha Shayar Hu" IN JANUARY 2016. This is my collection of Poems, Lyricis, and Shayari : Facebook page : https://www.facebook.com/tanhashayarhuyash/ https://storymirror.com/author/58cd9f312086f7c143aedf8f https://twitter.com/tanhashayarhu/

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia