ज़माल…

sushil sarna

रचनाकार- sushil sarna

विधा- मुक्तक

ज़माल…

इक यक़ीं इक ख़्वाब हो गया
हर सवाल बे-हिज़ाब .हो गया
थे हयात जो हमारी .साँसों के
वो ज़माल इक अज़ाब हो गया

सुशील सरना

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sushil sarna
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I,sushil sarna, resident of Jaipur , I am very simple,emotional,transparent and of-course poetry loving person. Passion of poetry., Hamsafar, Paavni,Akshron ke ot se, Shubhastu are my/joint poetry books.Poetry is my passionrn

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