ज़ख्म मेरे तू मुझे आज दिखाता क्या है….

CM Sharma

रचनाकार- CM Sharma

विधा- गज़ल/गीतिका

ज़ख्म मेरे तू मुझे आज दिखाता क्या है….
दास्ताँ मेरी मुझे ही तू सुनाता क्या है…

ख्वाब में आके सताना तो ठीक था लेकिन…
ज़िन्दगी मेरी में आकर तू रुलाता क्या है….

मैंने तो यूं ही लिख डाली थी ग़ज़ल तुमपे….
बेसबब ही मुझे तू रोज़ सुनाता क्या है…

तेरी पेशानी है चमके, मेरी लकीरें पिटी सी…..
पता है मुझको अंजाम तू, दोहराता क्या है….

बचा है जो भी ले के, निकल जा चुपचाप…
गिरती दीवार पे चरागों को जलाता क्या है….

आँखें कुछ 'चन्दर' लब और ही ब्यान करते हैं…
नहीं मिलता है दिल तो हाथ मिलाता क्या है….
\
/सी. एम्. शर्मा…

Views 119
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
CM Sharma
Posts 17
Total Views 2.1k
उठे जो भाव अंतस में समझने की कोशिश करता हूँ... लिखता हूँ कही मन की पर औरों की भी सुनता हूँ.....

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia