ग़ज़ल

तेजवीर सिंह

रचनाकार- तेजवीर सिंह "तेज"

विधा- अन्य

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

दुश्मनी भी न हम से निभाई गई।
ये नज़र जब नज़र से मिलाई गई।

चाक हैं दिल-जिगर नैन में नीर है।
दिल्लगी ना किसी से बताई गई।

मैं सलाई चला बुन चुकी ख़्वाब जो।
आँख खुलते कहाँ ये बुनाई गई।

चोट दे-दे के सब बन रहे रहनुमां।
ए ख़ुदा तेरी कितको खुदाई गई।

रूह तक ज़ख्म का सिलसिला देखिए।
पर दवा भी न कोई लगाई गई।

प्यास से जान मेरी चली जा रही।
अंजुरी भर न उनसे पिलाई गई।

'तेज' सुर में कोई तो ग़ज़ल अब कहो।
जो न महफ़िल में अब तक सुनाई गई।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
© तेजवीर सिंह 'तेज'

Views 10
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
तेजवीर सिंह
Posts 64
Total Views 555
नाम - तेजवीर सिंह उपनाम - 'तेज' पिता - श्री सुखपाल सिंह माता - श्रीमती शारदा देवी शिक्षा - एम.ए.(द्वय) बी.एड. रूचि - पठन-पाठन एवम् लेखन निवास - 'जाट हाउस' कुसुम सरोवर पो. राधाकुण्ड जिला-मथुरा(उ.प्र.) सम्प्राप्ति - ब्रजभाषा साहित्य लेखन,पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन तथा जीविकोपार्जन हेतु अध्यापन कार्य।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia