ग़ज़ल

Ramkishore Upadhyay

रचनाकार- Ramkishore Upadhyay

विधा- गज़ल/गीतिका

सपना भी रुचिकर हो जाता,
गर उसका दिल घर हो जाता \1\
*
सबके दुख जो खुद सहले वो,
दुनियां में ईश्वर हो जाता\2\
*
झूठी बात लगे सब अच्छी ,
सच बोले नश्तर हो जाता\3 \
*
गर वो छू लेता पांवो को ,
ऊँचा उसका सर हो जाता \4\
*
यदि वो हंस पड़ती होले से,
मेरा भी कम डर हो जाता \5\
*
नीचा कर लेता वो सर को,
या फिर ऊँचा दर हो जाता \6\
*
जो पूजे नित मात पिता को ,
मन उसका मन्दिर हो जाता \7\
**
रामकिशोर उपाध्याय

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Ramkishore Upadhyay
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मैं हिंदी में कविता ,ग़ज़ल ,मुक्तक ,कहानी और व्यंग्य लिखता हूँ |

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6 comments
  1. वाह्ह्ह्ह्ह्ह् बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल ।
    झुठी बात ……क्या बात है
    सबके दुख जो खुद ……वाह्ह्ह् वाह्ह्ह्ह् गज़ब शेर

    • आदरणीया ,सराहना के लिए और इस पटल से परिचय करवाने के लिए ह्रदय से आभार

  2. बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी …बेह्तरीन अभिव्यक्ति

    • शुक्रिया तहेदिल से इस दाद के लिये जनाब