ग़ज़ल- नहीं सोचा वही

आकाश महेशपुरी

रचनाकार- आकाश महेशपुरी

विधा- गज़ल/गीतिका

ग़ज़ल- नहीं सोचा वही…
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नहीं सोचा वही हर बार निकला
सितमगर तो मेरा ही यार निकला

मुहब्बत से भरीं आँखें ये तेरी
लबों से क्यूँ मगर इंकार निकला

मुझे मिलती यकीनन आज मंजिल
किनारा ही मगर मझधार निकला

कलेजा ही हमारा फट गया ये
कि जबसे फूल है अंगार निकला

हँसाता एक बन्दा जो सभी को
हकीकत में बहुत बेजार निकला

जिसे 'आकाश' कहते थे भवँर है
वही बस एक है पतवार निकला

– आकाश महेशपुरी

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आकाश महेशपुरी
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पूरा नाम- वकील कुशवाहा "आकाश महेशपुरी" जन्म- 20-04-1980 पेशा- शिक्षक रुचि- काव्य लेखन

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