ग़ज़ल।तुम्हारे प्यार की दुनिया दिवानी अब नही होती ।

रकमिश सुल्तानपुरी

रचनाकार- रकमिश सुल्तानपुरी

विधा- गज़ल/गीतिका

ग़ज़ल।तुम्हारे प्यार क़ी दुनिया दिवानी अब नही होती।

अधूरे रह गये किस्से कहानी अब नही होती ।
तुम्हारे प्यार की दुनिया दिवानी अब नही होती ।।

दिलों को तोड़कर बेसक दिया तुमने है तन्हाई ।
ज़लवा हुश्न में पागल शयानी अब नही होती ।।।

तुम्हें तो याद ही होगा तुम्हारा तो जबाना था ।
बेगाने हो रहे अपने जवानी अब नही होती ।।

पता चल ही गया होगा तुम्हे भी अश्क़ की क़ीमत । निगाहें कातिलानी वो गुमानी अब नही होती ।।

करोगे क्या वफ़ाई तुम मिली तुमको तो तन्हाई ।
जफ़ा में प्यार की क़ीमत चुकानी अब नही होती ।।

मेरे ही सामने मसलन मेरे खत को जलाया था ।
तेरे नफ़रत की वो यांदें पुरानी अब नही होती ।।

खुदा का फ़ैसला ही है अकेले रह गये "रकमिश" ।
कि तोहफ़े अब नही होतें निसानी अब नही होती ।।

राम केश मिश्र"रकमिश"

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रकमिश सुल्तानपुरी
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रकमिश सुल्तानपुरी मैं भदैयां ,सुल्तानपुर ,उत्तर प्रदेश से हूँ । मैं ग़ज़ल लेखन के साथ साथ कविता , गीत ,नवगीत देशभक्ति गीत, फिल्मी गीत ,भोजपुरी गीत , दोहे हाइकू, पिरामिड ,कुण्डलिया,आदि पद्य की लगभग समस्त विधाएँ लिखता रहा हूं । FB-- https ://m.facebook.com/mishraramkesh मेरा ब्लॉग-gajalsahil@blogspot.com Email-ramkeshmishra@gmail.com Mob--9125562266 धन्यवाद ।।

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