ग़ज़ल।तब उसी तारीख़ से तेरा दिवाना जो गया ।

रकमिश सुल्तानपुरी

रचनाकार- रकमिश सुल्तानपुरी

विधा- गज़ल/गीतिका

=============ग़ज़ल===================

ज़ब नज़र के ख़ंजरों का दिल निशाना हो गया ।
तब उसी तारीख़ से तेरा दिवाना हो गया ।

तू रुकी थी मुस्कुरायी खिलखिलाती हँस पड़ी ।
रात आयी शाम तक मौसम सुहाना हो गया ।

हौसलें बढ़ने लगे यूं ही तेरे दीदार को ।
आहटें आने लगी आहे चुराना जो गया ।

हो गया मालूम तुमको तो अदाओं की सज़ा ।
सह रहा पर वक्त पर वादा निभाना हो गया ।

इश्क की उस कशमकश मे बढ़ गयी बेताबियाँ ।
काम आयी जब दुआयें पास आना हो गया ।

शुक्रिया तेरा हमेशा वक़्त जो तुमने दिया ।
ज़िन्दगी मे आपका अब आना जाना जो गया ।

आईने आँखों मे 'रकमिश " क़ैद तस्वीरें हुई ।
बेख़बर हो ख़ुद व ख़ुद ही मुस्कुराना हो गया ।

✍ रकमिश सुल्तानपुरी

Sponsored
Views 2
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
रकमिश सुल्तानपुरी
Posts 104
Total Views 1.8k
रकमिश सुल्तानपुरी मैं भदैयां ,सुल्तानपुर ,उत्तर प्रदेश से हूँ । मैं ग़ज़ल लेखन के साथ साथ कविता , गीत ,नवगीत देशभक्ति गीत, फिल्मी गीत ,भोजपुरी गीत , दोहे हाइकू, पिरामिड ,कुण्डलिया,आदि पद्य की लगभग समस्त विधाएँ लिखता रहा हूं । FB-- https ://m.facebook.com/mishraramkesh मेरा ब्लॉग-gajalsahil@blogspot.com Email-ramkeshmishra@gmail.com Mob--9125562266 धन्यवाद ।।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia