ग़ज़ल।कि क़ातिल चैन से यारों हुक़ूमत पेश करते है ।

रकमिश सुल्तानपुरी

रचनाकार- रकमिश सुल्तानपुरी

विधा- गज़ल/गीतिका

=================ग़ज़ल================

ज़िरह मुंसिफ़ वफ़ाई की ज़मानत पेश करते है ।
कि क़ातिल चैन से यारों हुक़ूमत पेश करते है ।

बहुत कम है बचे मुफ़लिश ख़ुदा को मानने वाले ।
उन्हें शक़ है मग़र झूठी इबादत पेश करते हैं ।

सफ़ऱ ऐ जिंदगी गर्दिश लुटा हर रहगुज़र रोया ।
दग़ा कर रहनुमां सारे मुरौव्वत पेश करते हैं ।

ढही बुनियाद क़ानूनी गवाहों के सबूतों दम ।
यकीं है सच भी मालुम पर दलीलत पेश करते हैं ।

दिवानों की नवाज़िश मे छिपी है रंजिसे साज़िश ।
सजाकर आँख मे आँसू मुहब्बत पेश करते हैं ।

जिहादी हो गये मसलन वफ़ा मे ज़ेर पैगम्बर ।
ख़ुदाई के लिये ख़ुद की ज़रूरत पेश करते है ।

लगा ले ज़ोर अजमाइस भले बख़्सेगी न दुनिया ।
डगर ऐ नर्क को रकमिश हि जन्नत पेश करते है ।

©© सर्बाधिकार सुरक्षित
✍ रकमिश सुल्तानपुरी

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रकमिश सुल्तानपुरी
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रकमिश सुल्तानपुरी मैं भदैयां ,सुल्तानपुर ,उत्तर प्रदेश से हूँ । मैं ग़ज़ल लेखन के साथ साथ कविता , गीत ,नवगीत देशभक्ति गीत, फिल्मी गीत ,भोजपुरी गीत , दोहे हाइकू, पिरामिड ,कुण्डलिया,आदि पद्य की लगभग समस्त विधाएँ लिखता रहा हूं । FB-- https ://m.facebook.com/mishraramkesh मेरा ब्लॉग-gajalsahil@blogspot.com Email-ramkeshmishra@gmail.com Mob--9125562266 धन्यवाद ।।

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