ग़ज़ल।आइना उसको दिखाना चाहिए ।

रकमिश सुल्तानपुरी

रचनाकार- रकमिश सुल्तानपुरी

विधा- गज़ल/गीतिका

""'''''''''''''''''''""""""""""""""ग़ज़ल""""""""''''"'''""""""""""""

आग़ बदले की बुझाना चाहिए ।
हर किसी को मुस्कुराना चाहिए ।

नफ़रतों से ज़ख़्म ही मिलता सदा ।
रंजिशों को भूल जाना चाहिये ।

जिंदगी बस चार दिन की चाँदनी ।
प्यार से इसको सजाना चाहिए ।

मंज़िलों को छोड़कर दहलीज़ पर ।
फ़र्ज़ दुनियां मे चुकाना चाहिए ।

फ़र्क जिसको है नही सच झूठ का ।
आइना उसको दिखाना चाहिए ।

छोड़कर अब इश्क़ मे हैवानियत ।
दिल्लगी दिल से निभाना चाहिए ।

हो रही "रकमिश बड़ी तौहीनियां ।
अश्मिता सबको बचाना चाहिए ।

रकमिश सुल्तानपुरी

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रकमिश सुल्तानपुरी
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रकमिश सुल्तानपुरी मैं भदैयां ,सुल्तानपुर ,उत्तर प्रदेश से हूँ । मैं ग़ज़ल लेखन के साथ साथ कविता , गीत ,नवगीत देशभक्ति गीत, फिल्मी गीत ,भोजपुरी गीत , दोहे हाइकू, पिरामिड ,कुण्डलिया,आदि पद्य की लगभग समस्त विधाएँ लिखता रहा हूं । FB-- https ://m.facebook.com/mishraramkesh मेरा ब्लॉग-gajalsahil@blogspot.com Email-ramkeshmishra@gmail.com Mob--9125562266 धन्यवाद ।।

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