ग़ज़लनुमा

Chandra Prakash

रचनाकार- Chandra Prakash

विधा- गज़ल/गीतिका

ग़ज़लनुमा

मशवरा देना हो तो दे देना चाहिए ,
पीना चाहे कोई तो पिला देना चाहिए ।

चाँद , तारे , ये हवाएं सब तुम्हारी हैं ,
कोई गले से लगे तो लगा देना चाहिए ।

शहर घूमते हैं चलो तुम और मैं ,
भूखे को खाना खिला देना चाहिए ।

जंग करों , दुश्मनों से लड़ो ,
(तूफानों से लड़ो समुन्द्र से बातें करो )
कभी कभी माफ़ भी कर देना चाहिए ।

दोस्ती करो , हक़ जताओ ,
कभी -कभी दुश्मनों को भी मौका दे देना चाहिए ।

प्यार ख़रीद ना सको , भाव मालूम ना हो ,
है जितनी पूँजी लगा देनी चाहिए ।

मणि कोई नहीं है इस जग में मेरा
है प्यार किसी से तो बता देना चाहिए ।

माणिक्य

Sponsored
Views 4
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Chandra Prakash
Posts 23
Total Views 227

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia