ग़ज़ल- जबसे निकला है बेवफा कोई

आकाश महेशपुरी

रचनाकार- आकाश महेशपुरी

विधा- गज़ल/गीतिका

ग़ज़ल- जबसे निकला है बेवफा कोई
★★★★★★★★★★★★★★★★
जबसे निकला है बेवफा कोई
मर्द हो के भी रो रहा कोई

देखो कैसे उदास बैठा है
जैसे गुजरा हो हादसा कोई

जिसको दिल का करार कहते हैँ
दे दे इसका मुझे पता कोई

उसके अश्कोँ पे खुश हुआ था मैँ
इसकी दे दे मुझे सजा कोई

तुम तो पत्थर को मात देते थे
कैसे आँखोँ मेँ छा गया कोई

कुछ तो ऐसे हालात होते हैँ
यूँ ही करता नहीँ ख़ता कोई

चोट 'आकाश' हैँ पुराने से
जख़्म दे दे मुझे नया कोई

– आकाश महेशपुरी

Sponsored
Views 33
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
आकाश महेशपुरी
Posts 84
Total Views 4.7k
पूरा नाम- वकील कुशवाहा "आकाश महेशपुरी" जन्म- 20-04-1980 पेशा- शिक्षक रुचि- काव्य लेखन

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia