हौसला ज़िंदा

अजय कुमार मिश्र

रचनाकार- अजय कुमार मिश्र

विधा- हाइकु


ख़ामोश रात,
सुलगा अहसास,
तुम बिन मैं!

ज़िंदगी जंग,
किसी का नहीं संग,
फिर भी रंग!

रोटी महँगी,
है ज़िंदगी सस्ती,
भूखी बस्ती!

मार्ग कठिन,
मन है व्यथित,
हौसला ज़िंदा।

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अजय कुमार मिश्र
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रचना क्षेत्र में मेरा पदार्पण अपनी सृजनात्मक क्षमताओं को निखारने के उद्देश्य से हुआ। लेकिन एक लेखक का जुड़ाव जब तक पाठकों से नहीं होगा , तब तक रचना अर्थवान नहीं हो सकती।यहीं से मेरा रचना क्रम स्वयं से संवाद से परिवर्तित होकर सामाजिक संवाद का रूप धारण कर लिया है। कविता , शेर , ग़ज़ल , कहानियाँ , लेख लिखता रहा हूँ।

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