होली

Kaushlendra Singh Lodhi

रचनाकार- Kaushlendra Singh Lodhi

विधा- कुण्डलिया

होली पर्व है प्रेम का, भाई चारा धर्म।
मन का कलुष मिटाइए, समझ ज्ञान का मर्म।।
समझ ज्ञान का मर्म, जैन शिन्तो ईसाई।
हिन्दू मुस्लिम सिख, यहूदी बौद्ध बहाई।।
कहि 'कौशल' कविराय, प्रेम की भर लो झोली।
बोलो मीठे बोल, मनाओ सब संग होली।।

होली के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

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Kaushlendra Singh Lodhi
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कौशलेन्द्र सिंह लोधी "कौशल" कवि नि. मतरी बर्मेन्द्र, तहसील-उन्चेहरा, जिला-सतना (म.प्र.) I राजस्व निरीक्षक पद पर तहसील-पलेरा, जिला-टीकमगढ़ (म.प्र.) में सेवारत I शिक्षा - बी.एस-सी.(MPG)
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