** होली है भई होली है **

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- गीत

जबसे तूं हमसे ना बोली है
दिल में जली इक होली है
तूं माने या ना माने अब
दिल से अपनी हो ली है
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दिल बडा नादां है ये
अपनों से अंजान है ये
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अरे दिल की लगी दिल्लगी
दिल्लगी बस , नही दिल्लगी
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मोल नहीं तोल नहीं अब
दिल का कोई रोल नहीं
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जिंदगी रंगबिन बेरंग बनी
रंग में रंग गया जो अब
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रंग ना अब छोडेगा संग
तूं माने ना माने ना अब
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एक दूजे का चढ़ेगा रंग
जब होगा आपस में संग
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दिल से अपनी हो ली है
हो ली है हो ली है
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होली है भई होली है
बुरा ना मानो होली है ।।
***

👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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