होली (घनाक्षरी)

Kaushlendra Singh Lodhi

रचनाकार- Kaushlendra Singh Lodhi

विधा- घनाक्षरी

हरा पीला काला लाल।
नीला जामुनी गुलाल।।
लेके बड़े बूढ़े बाल।
चली कहाँ टोली रे।।

बजते नगाड़े ढोल।
करें सब मेल जोल।।
प्रेम रंग अनमोल।
बोले मीठी बोली रे।

रंग भरी पिचकारी।
रंगों की बौछार जारी।
खेल रहे नर नारी।
भर भर झोली रे।।

हिन्दू व मुसलमान।
ईसाई सभी समान।
प्रेम सबसे महान।
मिल खेलें होली रे।।

होली के पावन पर्व की हार्दिक शुभ कामनाएं🙏🏼🙏🏼

कौशलेन्द्र सिंह लोधी 'कौशल'

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 17
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
Kaushlendra Singh Lodhi
Posts 12
Total Views 277
कौशलेन्द्र सिंह लोधी "कौशल" कवि नि. मतरी बर्मेन्द्र, तहसील-उन्चेहरा, जिला-सतना (म.प्र.) I राजस्व निरीक्षक पद पर तहसील-पलेरा, जिला-टीकमगढ़ (म.प्र.) में सेवारत I शिक्षा - बी.एस-सी.(MPG)

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia