होली (घनाक्षरी)

Kaushlendra Singh Lodhi

रचनाकार- Kaushlendra Singh Lodhi

विधा- घनाक्षरी

हरा पीला काला लाल।
नीला जामुनी गुलाल।।
लेके बड़े बूढ़े बाल।
चली कहाँ टोली रे।।

बजते नगाड़े ढोल।
करें सब मेल जोल।।
प्रेम रंग अनमोल।
बोले मीठी बोली रे।

रंग भरी पिचकारी।
रंगों की बौछार जारी।
खेल रहे नर नारी।
भर भर झोली रे।।

हिन्दू व मुसलमान।
ईसाई सभी समान।
प्रेम सबसे महान।
मिल खेलें होली रे।।

होली के पावन पर्व की हार्दिक शुभ कामनाएं🙏🏼🙏🏼

कौशलेन्द्र सिंह लोधी 'कौशल'

Views 15
Sponsored
Author
Kaushlendra Singh Lodhi
Posts 4
Total Views 60
कौशलेन्द्र सिंह लोधी "कौशल" कवि नि. मतरी बर्मेन्द्र, तहसील-उन्चेहरा, जिला-सतना (म.प्र.) I राजस्व निरीक्षक पद पर तहसील-पलेरा, जिला-टीकमगढ़ (म.प्र.) में सेवारत I शिक्षा - बी.एस-सी.(MPG)
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia