होली गीत

Radhey shyam Pritam

रचनाकार- Radhey shyam Pritam

विधा- गीत

रंगबिरंगें फूलों जैसा,है त्योहार ये होली का।
प्यार सिखाए भेद भुलाके,ये त्योहार होली का।।

(1)
गाल गुलाबी,चाल शराबी,हाथ में ले पिचकारी।
रंग उडाएँ,नाचें गाएँ,छैल-छबीले मारें किलकारी।
ढोल-नगाडे बजने लगे,आया त्योहार होली का।
प्यार सिखाए…………………।
(2)
जोकर बने हैं आज सभी,देख आए मुख पे हँसी।
काले-पीले,रंग-रंगीले,हो गए हैं,देखो रे! सभी।
प्यार खुशी का है खजाना,ये त्योहार होली का।
प्यार सिखाए…………………।
(3)
इन्द्रधनुषी हो जाएं सारे,मिलजुल गाएं होली में।
भेदभाव की तोडें दीवारें,भरलें प्यार बोली में।
बुराई पर अच्छाई की जीत,का त्योहार होली का।
प्यार सिखाए…………………।
(4)
देते हैं शुभकामनाएँ,फूलें-फलें"प्रीतम"यहाँ सभी।
गले मिलें,कभी न लडें,फूल-खुशबू से रहें सभी।
देता है संदेश यही,ये त्योहार.रे भाई!होली का।
प्यार सिखाए भेद भुलाके,ये त्योहार होली का।
रंगबिरंगे फूलों जैसा,है त्योहार ये होली का।
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राधेयश्याम बंगालिया
प्रीतम…….कृत

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Radhey shyam Pritam
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