** होली खेलत नन्दलाल **

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- गीत

. राधिका गोरी संग
ब्रज की छोरी संग
बनवारी बिहारी अब
होली खेलत नन्दलाल
बचाये भोली राधा अपने
अपने तन के तंग अंग
माने ना चंचल कान्हा
डारे फिर फिर श्यामल रंग
चाहे कितना ही बचाले राधिका
अपने अंग की अंगिया को
कान्हा छोड़े ना राधिका
गोरी को बिन डारे रंग
अब बचा न पायेगी
श्याम से श्यामल रंग
गोपिका देखकर भीगे
बदन रह जायेगी दंग
कहीं पी ली ना भंग
अब खेले राधा संग
होली खेलत ननंदलाल ।।। 👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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