*** होली के रंग ***

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- गीत

होली के रंग
खेलो प्रीतम संग
लाल है गुलाल
गाल है गुलाल
तन है लाल लाल
मन है लाल लाल
खेले है हर बाल
आये हर साल
होली का त्योंहार
कोई धरे मनमोहन
मोहिनी का रूप
कोई हो जाये
इतना कुरूप
रंगो का ये मेल
दिलों का ये खेल
रह ना जाये कोई
दिलों में भेद
खेलो जी भर के
होली का ये खेल
रह ना जाये कोई
दिल में फिर खेद
होली मनाओ
अपने प्रीतम संग
रंगो का त्यौहार
रंगलो तन मन
प्रीतम के रंग संग । 👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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