होली के रंग।

Rishikant Rao

रचनाकार- Rishikant Rao

विधा- शेर

उन गुलाबी चाँद के चेहरे पे थोड़ी रंग लगा देते,
आइ्ये घनी गर्दीसो के बीच बाते कुछ सजा लेते।
बस एक चाह हमारी भी थी उन दिनों तक,
जो तुम पास होते हम भी रंग-ए-जस्न मन लेते।

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Rishikant Rao
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बड़ी खूबसूरत कटारी है तू, लगता है पाकिस्तान की अटारी है तू, गिरफ्तार हो जाऊँगा एक दिन ! ज़िंदगी के सफ़र की अच्छी सफारी है तू !
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