होली के बहाने

kamlesh goyat

रचनाकार- kamlesh goyat

विधा- गज़ल/गीतिका

नफरत को सुला प्रीत दिलों में जगा लें होली के बहाने,
छोड़ जाए जो प्यार का पैगाम,उस रंग को लगा लें होली के बहाने।
लाल,पीला,नीला,हरा सबका होता अपना रंग,
आ हर रंग को आजमा लें होली के बहाने।
कहीं देवर-भाभी तो कहीं बुजुर्ग जोड़ी करे ठिठौली,
याद जरा करलें वक्त वो मलचला होली के बहाने।
ना बचकानी हरकत हो और ना फूहड़ता,
मस्ती का निराला उत्सव मना लें होली के बहाने।
जिंदगी उलझ गई कमलेश जीवन की उलझन में,
आ हर उलझन को सुलझा लें होली के बहाने।
कमलेश गोयत

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kamlesh goyat
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मैं कमलेश गोयत। हिंदी उपन्यास लिखती हूँ। कविता लिखने की कोशिश भी करती हूँ। मेरा दूसरा उपन्यास विजेता आजकल साहित्यपीडिया पर प्रकाशित हो रहा है । 250 पृष्ठों का यह उपन्यास आपका भरपूर मनोरंजन करेगा। यह हर पाठक वर्ग के लिए पठनीय है। यह ऐसी बेटी की कहानी है जिसके दादा-दादी अंधविश्वास के कारण उसे अपने बहू-बेटे को बिना बताए त्याग देते हैं और परिस्थितयाँ कुछ यूं बदलती हैं कि वही दादा-दादी अपनी उस पोती के लिए उपवास करते हुए प्राण त्याग देते हैं।
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