-होली आई – रे ( होली गीत )

रणजीत सिंह रणदेव चारण

रचनाकार- रणजीत सिंह रणदेव चारण

विधा- गीत

देखों-देखों होली आई रें, खुशियां रंगा में छाई रे।
हाँ रे होली आई रें, खूब धुम – धाम मचाई रे।।
देखों – देखों……………………….. ।

ठण्डी – ठण्डी पवन रें साथे रंग – गुलाल उडावे हैं।
रंग – भंग सी हुडदंग मचगी टाबर खूब चिलावें हैं।।
अब तों इन्द्रधनुष आंखों में आगे दिख आई रें।
देखों – देखों……………………… ।

अब तो आकाश भी रंग-बिरांगों ओं नाच दिखावे हैं।
बारिश कें गर्जन की मिथ्या मन ही मन बतावें हैं।।
बच्चें सारे पानी ढूंढ रहे फिर भी बादल चल जाई रें।
देखों – देखों………………………..।

तन – मन में होली री खुश्बू अब खुब सजावें हैं ।
पिचकारियां रंगों में भर बच्चे तों खुब छिटावें हैं।
जैसे होली तो सब के लिए तसरीफ लें आई रें।
देखों – देखो……………………….. ।

समझ नहीं मैं समझ न आता मस्ती बन छाई हैं।
गुस्से वाले चेहरों में रंगों सी हंसी छलकती आई हैं।
कैसी होली जहां भी देखों कहते वा रे होली आई रे।
देखों – देखो………………………।

बसंत बैचारा मन में खिलता वातावरण चमकाई रें।
फाल्गुन की तो नया तो होली सुं अब गुंजाई रें।।
रणदेव में होली री खुशियां रंगों में ही छाई रें।
देखो देखों……………………….. ।

देखों-देखों होली आई रें, खुशियां रंगा में छाई रे।
हाँ रे होली आई रें, खूब धुम – धाम मचाई रे।।

रणजीत सिंह "रणदेव" चारण
"मुण्डकोशियाॅ,
7300174627

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रणजीत सिंह " रणदेव" चारण गांव - मुण्डकोशियां, तहसिल - आमेट (राजसमंद) राज. - 7300174627 (व्हाटसप न.) मैं एक नव रचनाकार हूँ और अपनी भावोंकी लेखनी में प्रयासरत हूँ। लगभग इस पिडीया पर दी गई सभी विधाओं पर लिख सकता हूँ। आप सभी मेरी प्रत्येक रचना को पढकर अपनी टिप्पणी देंवे और कोई गलती हो तो सुधार भी बतावें। मेरी आशा मेरा हौंसला। धन्यवाद

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