होकर मायूस न यूँ

कृष्णकांत गुर्जर

रचनाकार- कृष्णकांत गुर्जर

विधा- गज़ल/गीतिका

हो कर मायूस न यूँ शाम से ढलते रहिए;
ज़िंदगी भोर है सूरज से निकलते रहिए;

यहाँ अपनो मे पराये नजर आयेगे जनाव
मुस्कुराकर अपनो से सदा मिलते रहिये

कही फूल कही काँटे बिछेगे तेरी राहो मे
हसते हुये काँटो पर भी चलते रहिये

एक ही पाँव पर ठहरोगे तो थक जाओगे;
धीरे-धीरे ही सही राह  पर सदा चलते रहिए।

अपना तो सदा अपना होता है जमाने मे
परायो के साथ हँस कर मिलते रहिये

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कृष्णकांत गुर्जर
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संप्रति - शिक्षक संचालक G.v.n.school dungriya G.v.n.school Detpone मुकाम-धनोरा487661 तह़- गाडरवारा जिला-नरसिहपुर (म.प्र.) मो.7805060303

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