है याद मुझे कोयल की कूक व अमराई

Pritam Rathaur

रचनाकार- Pritam Rathaur

विधा- गज़ल/गीतिका

ग़ज़ल
******
221 1222 221. 1222

तकिये को भिगो देती जब याद मेरी आई
वो मेरी मुहब्बत को अब तक न भुला पाई

हम करते रहे उससे दिन रात वफा लेकिन
पर हमको सितमग़र से मिलती रही रुसवाई

दे दे के सदा उसको हमने तो बुलाया पर
मिलने को कभी हमसे मगरूर नहीं आई

तारीफ़ करे कोई क्या तेरे शबाहत की
जैसे कि किरन कोई पूरब से निकल आई

पहले ही तड़पता है ये दर्द से दिल मेरा
इक टीस जगाती है जब चलती ये पुरवाई

बरबाद किया मुझको अपनों ने मुहब्बत में
मैं आज तमाशा हूँ वो लोग तमाशाई

वो चाँद भी शरमाए जब देखे तेरा चहरा
जो सादग़ी है तुझमें फूलों में नहीं पाई

वहशत में हैं अब जीते अपने ये वतन वाले
ये कैसी तनफ़्फुर की हर सिम्त घटा छाई

दिल मेरा मचलता है अब बाँध लूँ मैं सेहरा
जब घर में पड़ोसी के बजती है ये शहनाई

है चीज यहाँ दौलत जो खून करा देती
फिर भूल मरासिम को लड़ते हैं सगे भाई

जब वक्त हो गर्दिश का कोई साथ नहीं देता
है बात न गैरों की दे साथ न परछाई

परदेश में आकर के भूले न वतन अपना
है याद मुझे कोयल की कूक व अमराई

दुशमन भी दगा ऐसे देगा न किसी को भीे
जो आज दगा हमनें तुमसे है सनम खाई

ये नाज़ो अदा "प्रीतम" उसकी है निराली ही
लगता है सदाक़त वो कलियों से चुरा लाई

प्रीतम राठौर भिनगाई
श्रावस्ती (उ०प्र०)
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

Sponsored
Views 4
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Pritam Rathaur
Posts 167
Total Views 1.5k
मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है मानवता की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। सर्वोच्च पूजा जीवों से प्रेम करना ।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia