हे राम

guru saxena

रचनाकार- guru saxena

विधा- कविता

हे राम

साधू सन्यासी वा बाबा त्यागी तपसी तीर्थ समान
दर्शन कर चरणों में लागो मिले तुरत ही पुण्य महान
मान्यतायें हैं यही पुरातन हम सब माने जाते हैं
पर कुछ पापी नाम साधुओं का बदनाम कराते हैं
ऊपर से मीठे लगते हैं भीतर से होते हैं नीम
इसी कड़ी में आए सामने सिरसा वाले राम रहीम

लाखों जनमानस में जिनका श्रद्धा भक्ति भाव बढ़ा
अनाचार से दुराचार से स्वयं पाप का भरा घड़ा
रामपाल या आसाराम हों राम रहीम भले हो नाम
राम सभी में जुड़ा देश का क्या होगा आगे हे राम
हुई न्याय की जीत अंत में कपट छिपा ना काहू से
कालनेमि रावण से साधु बने देवता राहु से
साधू संन्यासी बाबाओ भले ज्ञान जैसा दे लो
भोली भाली इस जनता की भावनाओं से मत खेलो.

गुरु सक्सेना नरसिंहपुर मध्य प्रदेश

Sponsored
Views 3
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
guru saxena
Posts 32
Total Views 278

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia