हे ! मेरे फेसबुक …………

Brijpal Singh

रचनाकार- Brijpal Singh

विधा- लेख

फेसबुक ने मुझे नई
ज़िंदगी दी जीने की
एक वजह दी,
प्यार भी हुआ तो
फेसबुक पर ही
धोखा मिला
फेसबुक से ही
अपने बने कुछ
इसी फेसबुक से
कुछ दूर भी हो गए
इसी फेसबुक से
आज पहचान है कुछ
तो फेसबुक से ही
मुस्कुराता हूँ कभी
इसी फेसबुक से
हँसता हूँ कभी तो
कभी दुःख भी व्यक्त करता हूँ
इसी फेसबुक से
क्या क्या न दिया
इस फेसबुक ने
खोया हुआ इंसान भी मिला
दिया इस फेसबुक ने
आप भी साथ हो मेरे मगर
इसी फेसबुक पे !
हम सभी दूर हैं
एक दूसरे से
तो क्या हुआ एहसास
तो ज़िंदा है
इसी फेसबुक से
कुछ नया हुआ
तो पता चला इसी
फेसबुक से
कोई चला भी गया
वो भी जान पाया
इसी फसेबुक से
कुछ विचित्र सी बातें
जान सका इसी
फेसबुक से
दुनिया को पहचान रहा हूँ
इसी फेसबुक से
ज़ुकरबर्ग का तो पता नहीं
बस मौज उड़ा रहे हैं सब
इसी फेसबुक पे
सब बैठे हैं सामने
मगर मस्त हैं सब
इसी फेसबुक पे
कोई ठहासे लगा रहा
तो किसी की आँखें नम हैं
इसी फेसबुक से
कोई परेशान हैं
लाइक न मिलने से तो
कोई कॉपी पेस्ट में
व्यस्त है खुद की ख़ुशी के लिए
हे ! मेरे फेसबुक,हे ! मेरे फेसबुक
________________________________बृज

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Brijpal Singh
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मैं Brijpal Singh (Brij), मूलत: पौडी गढवाल उत्तराखंड से वास्ता रखता हूँ !! मैं नहीं जानता क्या कलम और क्या लेखन! अपितु लिखने का शौक है . शेर, कवितायें, व्यंग, ग़ज़ल,लेख,कहानी, एवं सामाजिक मुद्दों पर भी लिखता रहता हूँ तज़ुर्बा हो रहा है कोशिश भी जारी है !!

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8 comments
  1. जी जरुर, कोई और साइट पर देखी होगी . काव्योदय या काव्यासागर इत्यादि पर मैने पोस्ट की है !