प्रेम

Rita Yadav

रचनाकार- Rita Yadav

विधा- कविता

दर्द निकाल दो हृदय तल से ,
क्या रखा है दर्द पीने में ?
अंतर्मन आलोकित कर लो ,
प्रेम दीप जलाकर सीने में,

प्रेम है ताकत प्रेम है दौलत,
मिलती शोहरत प्रेम बदौलत,
संताप कम हो जाता प्रेम से ,
प्रेम इबादत प्रेम सदाकत,

प्रेम से रिझते कृष्ण मुरारी ,
रमी सुध बुध खो गोपिया सारी,
पुकार लो एक बार प्रेम से,
दौड़ कर आ जाते हैं बनवारी,

सारी खुशियों का सार है प्रेम,
जीवन का विस्तार है प्रेम,
जीवन नैया डगमग ना हो,
सही जीवन जीने का आधार है प्रेम,

रीता यादव

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