हुनर

डॉ०प्रदीप कुमार

रचनाकार- डॉ०प्रदीप कुमार "दीप"

विधा- कविता

" हुनर "
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मुझ में भी था
हुनर !
टीलों
पहाड़ों और
वृक्षों पर चढ़ने का |
बहते झरने
बहती नदियों और
बहती हवा की
मंदित-मंदित ध्वनि का
एहसास करने का
हुनर !!
परागों की कसक
फूलों की महक और
मिट्टी की सौंधी खूशबू
को पहचानने का
हुनर !!
गुफाओं में
आवाज की प्रतिध्वनि
सुनने का और
जंगल के वीरानों में
बहारों की खोज का
हुनर !!
हाँ !!!
आज भी है !
मेरे अंतस में
प्रेम ,त्याग,समर्पण और
विश्वास का
हुनर !!
धैर्य ,मेहनत ,कर्म और
मर्म को जानने का
हुनर !!
कर्मठता
लगन, निष्ठा और
सहनशीलता का
हुनर !!
बस ! सहेज रखा है
थाति के रूप में !
हुनर को !
ताकि सिखा सकूँ !
अपनी भावी पीढ़ियों को
हुनर से…….
नव-हुनर को
विकसित करना ||

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डॉ० प्रदीप कुमार दीप

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डॉ०प्रदीप कुमार
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नाम : डॉ०प्रदीप कुमार "दीप" जन्म तिथि : 02/08/1980 जन्म स्थान : ढ़ोसी ,खेतड़ी, झुन्झुनू, राजस्थान (भारत) शिक्षा : स्नात्तकोतर ,नेट ,सेट ,जे०आर०एफ०,पीएच०डी० (भूगोल ) सम्प्रति : ब्लॉक सहकारिता निरीक्षक ,सहकारिता विभाग ,राजस्थान सरकार | सम्प्राप्ति : शतक वीर सम्मान (2016-17) मंजिल ग्रुप साहित्यिक मंच ,नई दिल्ली (भारत) सम्पर्क सूत्र : 09461535077 E.mail : drojaswadeep@gmail.com

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