हिन्दुस्तानी है हिन्दी

kalipad prasad

रचनाकार- kalipad prasad

विधा- कविता

आओ बच्चों तुम्हे पढ़ायें, सच्चे जीवन की बातें
पढ़ते जाओ लिखते जाओ, पढ़कर ही आगे जाते |
भारत गौरव गाथा गाओ, मिलकर नन्हे सब बच्चे
लय में मिठास कोयल जैसा, दिलों में भावना सच्चे ||

देवनागरी लिपि में हिन्दी, भाषा है अपनी प्यारी
तुम जैसा लिखो वैसा पढो, विशेषता इसकी न्यारी |
हँसते गाते सीखो इसको, सहज सरल है यह हिन्दी
छोड़ो गैर देश की भाषा, हिन्दुस्तानी है हिन्दी ||

मत छोड़ो तुम अपनी भाषा, पर हिन्दी को भी सीखो
हर भाषा की तहज़ीब अलग, सब तहजीबों को जानो |
दिल है विशाल जिसका जग में, कुटुंब दुनिया धानी है
भेद भाव भूलाकर बोलो, हम सब हिन्दुस्तानी हैं ||
©कालीपद ‘प्रसाद’

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kalipad prasad
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स्वांत सुखाय लिख्ता हूँ |दिल के आकाश में जब भाव, भावना, विचारों के बादल गरजने लगते हैं तो कागज पर तुकांत, अतुकांत कविता ,दोहे , ग़ज़ल , मुक्तक , हाइकू, तांका, लघु कथा, कहानी और कभी कभी उपन्यास के रूप में उतर जाते हैं | कवितायेँ कहानियाँ समाचार पत्रिका में प्रकाशित होती रहती है | दो कविता संग्रह प्रकाशित हो चुकी है | एक उपन्यास 'कल्याणी माँ' भी प्रकाशित हो चुका है | ये किताबे फ्लिप्कार्ट और अमेजोन

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