हिन्दी

maheshjain jyoti

रचनाकार- maheshjain jyoti

विधा- दोहे

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🌲 हिन्दी 🌲
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पखवाड़ा हिन्दी मना , करते हैं गुणगान ।
पर फिर पूरे सालभर, रखें न इसका ध्यान।।1
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पखवाड़े को त्याग कर , अब कुछ कीजे और ।
हिन्दी वर्ष मनाइये, करें बात पर गौर।।2
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पढ़ें लिखें हिन्दी सभी,बोलें हिन्दी भाष ।
तब पूरी हो पायगी, हिन्दी की अभिलाष ।।3
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जो बोलो वो ही लिखे ,भाषा बड़ी अनूप ।
हमको प्रिय ऐसी लगे, ज्यों जाड़े में धूप।।4
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अपनी भाषा रसभरी, व्यंजन पगे मिठास ।
स्वर कोयल से कूकते, मन उपजे उल्लास ।।5
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गीत राग पद रागिनी, रसिया छंद मल्हार ।
काव्य सवैया को मिला, हिन्दी का आधार ।। 6
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आओ अब संकल्प लें, करना है उत्थान ।
हिन्दी पढ़ लिख बोल के, पाना है सम्मान ।।7
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-महेश जैन 'ज्योति',
मथुरा ।
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maheshjain jyoti
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"जीवन जैसे ज्योति जले " के भाव को मन में बसाये एक बंजारा सा हूँ जो सत्य की खोज में चला जा रहा है अपने लक्ष्य की ओर , गीत गाते हुए, कविता कहते और छंद की उपासना करते हुए । कविता मेरा जीवन है, गीत मेरी साँसें और छंद मेरी आत्मा । -'ज्योति'

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