हिन्दी जन की बोली है (गीत)

suresh chand

रचनाकार- suresh chand

विधा- गीत

हिन्दी जन की बोली है
हम सब की हमजोली है

खेत और खलिहान की बातें
अपने घर संसार की बातें
उत्तर-दक्षिण फर्क मिटाती
करती केवल प्यार की बातें ​

हर भाषा की सगी बहिनिया
यह सबकी मुँह बोली है

हिन्दी है पहचान हमारी
हमको दिलो जान सी प्यारी
हिन्दी अपनी माँ सी न्यारी
हिन्दी है अभिमान हमारी

हिन्दी अपने देश की धड़कन
अपने दिल की बोली है

आओ मिलकर 'प्यार' लिख दें
मन की उजली दीवारों पे
पानी का छींटा दे मारें
नफ़रत के जलते अंगारों पे

यही भावना घर-घर बाँटें
हिन्दी सखी-सहेली है

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suresh chand
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जन्म -12 जुलाई 1972 को ग्राम व पो. जंगल चवँरी, थाना खोराबार, जिला-गोरखपुर (उ.प्र.) में । शिक्षा- एम.ए. (हिन्दी) तथा एल.एल.बी.। बाँसुरी एवं तबला से संगीत प्रभाकर। प्रथम काव्य संग्रह 'हम उन्हें अच्छे नहीं लगते' वर्ष 2010 में प्रकाशित। संप्रतिः भारतीय जीवन बीमा निगम, शाखा सी.ए.बी., बक्शीपुर, गोरखपुर में सहायक प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कार्यरत। email: suresh.kavi.lic@gmail.com ; मोबाइल +919451519473

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One comment
  1. हिन्दी
    मेरी भाषा है
    हिन्दी
    राजभाषा है
    हिन्दी
    मेरी माता है
    हिन्दी
    तेरी माता है
    दक्षिण भारत
    चले जाओ भइया
    फिर देखो
    किसकी भाषा है
    कानून साक्ष्य में
    जाकर देखो
    कौन की
    किसकी भाषा है।