हिंदी हैं हम वतन हैं हिंदुस्तान हमारा

meenakshi bhasin

रचनाकार- meenakshi bhasin

विधा- कविता

15 अगस्त आने को है। आज़ादी मिल चुकी है। मिली क्यों कि तब हमारे सामने एक लक्ष्य था- अंग्रेजों से छुटकारा।
हमने बहुत प्रगति कर ली है। किंतु हम अभी भी विकासशील के पथ पर ही हैं विकसित होने के लिए हमें एकजुट होना चाहिए और सबसे पहले तो अपने स्वेदेश के प्रति वही प्यार और एहसास जगाना होगा जो पहले था। आज हम सिर्फ शिकायतें करते हैं, करते कुछ भी नहीं। कोई व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं लेते–

हिंदी हैं हम वतन हैं हिंदुस्तान हमारा

याद दिलाओं स्वयं को, दोबारा चौबारा
हिंदी हैं हम वतन है, हिंदुस्तान हमारा
मंसा, वाचा, कर्मणा में हरदम लगाओ नारा
हिंदी हैं हम वतन है, हिंदुस्तान हमारा

स्कूलों में हमारे अनिवार्य है, अंग्रेजी में बतियाना
बोलोगें अगर तुम हिंदी, तो लगेगा भारी जुर्माना
स्कूल में आते-जाते बच्चे होते हैं, बहुत ही सादा सच्चे
मिट्टी के हैं ये सांचे, जो ढालो वैसा वतन हमारा
याद दिलाओं स्वयं को, दोबारा चौबारा
हिंदी हैं हम वतन हैं हिंदुस्तान हमारा

बोलो तुम अंग्रेजी, पहनों तो तुम अंग्रेजी
तुम्हारी शान बढ़ेगी, दिखोगे अगर विदेशी
ये माथे की बिंदिया, यह इठलाती हुई चुनरिया
उसपे शब्द हिंदी के क्या गवारों का तुम्हारा घराना?
याद दिलाओं स्वयं को, दोबारा चौबारा
हिंदी हैं हम वतन हैं हिंदुस्तान हमारा

दिमाग से हो चाहे पैदल, घिरे अनैतिकता के बादल
पर हो अंग्रेजी का एक्सेंट, चाहे करो मेढ़कों सी टर्र-टर्र
भाए न अपना सादा भोजन, खाना है दूजे की थाली का खाना
स्वेदेश पे अपनी शर्मिंदगी, विदेश पर तुम्हें है इतराना
याद दिलाओं स्वयं को, दोबारा चौबारा
हिंदी हैं हम वतन हैं हिंदुस्तान हमारा

हिंदी में काम कर लो, हिंदी में काम कर लो
मिलेगा सरकारी प्रोत्साहन, कुछ तो लिहाज़ कर लो
अंग्रेजों के शासन से तो मिल गई हमको मुक्ति,
बीत गए इतने वर्ष, अंग्रेजी न छोड़े दामन हमारा
याद दिलाओं स्वयं को, दोबारा चौबारा
हिंदी हैं हम वतन हैं हिंदुस्तान हमारा

जब मान ही नहीं है मन में
तो देश की शान बढ़ेगी कैसी,
मातृ-भूमि को तज के बोलो
प्रगति की रफ्तार बढ़ेगी कैसे,
जिस मिट्टी में जी रहे हैं, जिस मिट्टी का खा रहे हैं
रखते हैं उसी धरा से खुद को हमेशा अंजाना
याद दिलाओं स्वयं को, दोबारा चौबारा
हिंदी हैं हम वतन हैं हिंदुस्तान हमारा

कहता है बच्चा-बच्चा
कुछ भी नहीं है यहां अच्छा,
गंदगी यहां बहुत है,
भ्रष्टाचारी पहने विजय का तमगा
कुछ करते तो हम नहीं हैं
बस है शिकायतों का ताना-बाना
याद दिलाओं स्वयं को, दोबारा चौबारा
हिंदी हैं हम वतन हैं हिंदुस्तान हमारा

मीनाक्षी 10-08-17© सर्वाधिकार सुरक्षित

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meenakshi bhasin
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मेरा नाम मीनाक्षी भसीन है और मैं पेशे से एक अनुवादक हूं। दिल्ली के एक सरकारी कार्यालय में काम करते हुए मुझे करीब सात वर्ष हो चुके हैं। मुझे लिखने का बहुत शौंक है और शायद इसलिए मैं अपना काम बहुत आनंद से करती हूं। मुझे अपना कार्य कोई बोझ नहीं बल्कि अपनी दिनचर्या का एक अहम हिस्सा लगता है। मेरा मानना है कि लेखनी की ताकत बोलने से कहीं अधिक होती है।

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