हिंदी तो है शान हमारी

Dinesh Kushbhuvanpuri

रचनाकार- Dinesh Kushbhuvanpuri

विधा- गीत

विश्व के सभी हिंदी भाषियों को समर्पित-

गीत – हिंदी तो है शान हमारी।

हिंदी हम सबको है प्यारी।
हिंदी तो है शान हमारी॥
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कितनी सरल हमारी हिंदी।
बनी हिमालय की ये बिंदी॥
सकल हिंद की है ये भाषा।
जन जन की है ये अभिलाषा॥
बनकर रहती प्राण हमारी।
हिंदी तो है शान हमारी॥
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सबसे ही ये घुलमिल जाए।
संग संग सबके मुस्काए॥
सहज सरल संतोषी है ये।
मृदुल भाव की शोखी है ये॥
भारत की है राजदुलारी।
हिंदी तो है शान हमारी॥
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वीरों के ये साथ खड़ी थी।
अंग्रेजों के साथ लड़ी थी॥
उत्तर दक्षिण पूरब पश्चम।
लहराया था इसका परचम॥
बनी सदा अभिमान हमारी।
हिंदी तो है शान हमारी॥
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बने जीविका अभिनेता की।
बनती गौरव यह नेता की॥
पर ये दोनों नाम भुनाते।
अपनाने में हैं शर्माते॥
मगर टूटती नहीं खुमारी।
हिंदी तो है शान हमारी॥
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सूर कबीर जायसी तुलसी।
कृष्ण प्रेम में मीरा हुलसी॥
बच्चन की बनकर मधुशाला।
किया सभी जन को मतवाला॥
बनी सदा अरमान हमारी।
हिंदी तो है शान हमारी॥
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हिंदी भाषण विश्व पटल पर।
गर्वित सारे हुए अटल पर॥
इस भाषा में मोदी गरजे।
करने लगे विदेशी चर्चे॥
बनी पुनः पहचान हमारी।
हिंदी तो है शान हमारी॥
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जननी है यह तो हम सबकी।
ममतामयी कल्पना रब की॥
सभी करें मिल इसकी सेवा।
ईश्वर देंगे सबको मेवा॥
मातु शारदे इस पर वारी।
हिंदी तो है शान हमारी॥
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दिनेश कुशभुवनपुरी
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Dinesh Kushbhuvanpuri
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