हिंदी अपनी शान हो

हिमकर श्याम

रचनाकार- हिमकर श्याम

विधा- दोहे

आज़ादी बेशक़ मिली, मन से रहे गुलाम।
राष्ट्रभाषा पिछड़ गयी, मिला न उचित मुक़ाम।।

सरकारें चलती रहीं, मैकाले की चाल।
हिंदी अपने देश में, उपेक्षित बदहाल।।

निज भाषा को छोड़कर, परभाषा में काज ।
शिक्षा, शासन हर जगह, अंग्रेजी का राज।।

मीरा, कबीर जायसी, तुलसी, सुर, रसखान।
भक्तिकाल ने बढ़ाया, हिंदी का सम्मान।।

देश प्रेमियों ने लिखा, था विप्लव का गान।
प्रथम क्रांति की चेतना, हिंदी का वरदान।।

हिंदी सबको जोड़ती, करती है सत्कार।
विपुल शब्द भण्डार है, वैज्ञानिक आधार।।

स्वर व्यंजन के मेल का, नहीं है कोई जोड़।
देवनागरी को कहें, ध्वनि शास्त्री बेजोड़।।

बिन हिंदी चलता नहीं, भारत का बाज़ार।
टी .वी., फिल्मों को मिला, हिंदी से विस्तार।।

भाषा सबको बाँधती, भाषा है अनमोल।
हिंदी उर्दू जब मिले, बनते मीठे बोल।।

सब भाषा को मान दें, रखें सभी का ज्ञान।
हिंदी अपनी शान हो, हिंदी हो अभिमान।।

हिंदी हिंदुस्तान की, सदियों से पहचान।
हिंदीजन मिल कर करें, हिंदी का उत्थान।।

© हिमकर श्याम

Sponsored
Views 44
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
हिमकर श्याम
Posts 17
Total Views 932
स्वतंत्र पत्रकार, लेखक और ब्लॉगर http://himkarshyam.blogspot.in https://doosariaawaz.wordpress.com/

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia
2 comments