हाईकु एकादश

Rajendra jain

रचनाकार- Rajendra jain

विधा- हाइकु

आज के हमारे अभी अभी के हाईकु सादर…

स्वप्न
हाईकु-एकादश

स्वप्न का लोक
बहुत सुहाना है
पल भर का।

वास्तविकता
सपने टूटते है
ध्यान रखिए

सपने देखें
सच तब ही होंगे
खुद से लेखें

सपने सच
दिल साफ रखिए
अजूबे रच।

जिंदगी भी तो
सपना है देखिये
टूटती कैसे

एक सपना
एक देश अपना
रोज जपना

अच्छा सोचिए
स्वप्न आएंगे अच्छे
जो होंगे सच्चे

हिंसा कभी ना
सपने सृजन के
राष्ट्र हित मे

बड़े सपने
भेद भाव तजिए
सभी अपने
१०
स्वप्न गहरे
जागकर सँभलें
लगा पहरे
११
गूँगे बहरे
स्वप्न सच मानते
डूबें गहरे

राजेन्द्र'अनेकांत'
बालाघाट दि. २०-०२-१७

राजेन्द्र'अनेकांत'
बालाघाट दि.२२-०२-१६

Views 3
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Rajendra jain
Posts 20
Total Views 110
प्रकृति, पर्यावरण, जीव दया, सामाजिक चेतना,खेती और कृषक की व्यथा आदि विषयों पर दोहा, कुंडलिया,चोपाई,हाईकु आदि छंद बद्ध तथा छंद मुक्त रचना धर्मिता मे किंचित सहभागिता.....

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia